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मुकद्दर बदल जाती है

मुकद्दर बदल जाती है लगातार संघर्ष करने से किस्मत चमक जाती है हौसलों से हर मंजिल हासिल करने में सफलता मिली है

Shayari sangrah Gorakhpur

अपनी मुकद्दर बदल जाएगी थोड़े फासले हैं जो धीरे-धीरे कम हो जाएंगे


उस बेवफा ने मेरी जिंदगी का ऐसा हसल कर दिया आंखों से आंसू लहू बनकर बहते हैं

Shayari sangrah Gorakhpur

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